1-Balkand / Sarga 77
Shloka 23
Shloka
गुरूणां गुरुकार्याणि काले कालेऽन्ववैक्षत।एवं दशरथः प्रीतो ब्राह्मणा नैगमास्तथा ॥२३॥
Sarga 77 / Shloka 23 Balkand