1-Balkand / Sarga 77
Shloka 13
Shloka
देवतायतनान्याशु सर्वास्ताः प्रत्यपूजयन्।अभिवाद्याभिवाद्यांश्च सर्वा राजसुतास्तदा ॥१३॥
Sarga 77 / Shloka 13 Balkand