1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 77 / Shloka 11 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 77
Shloka 11

Balkand

77 Sarga
29 Shloka
1/77/11
1-Balkand / Sarga 77 Shloka 11
Shloka
वधूप्रतिग्रहे युक्ता याश्चान्या राजयोषितः।
ततः सीतां महाभागामूर्मिलां च यशस्विनीम् ॥११॥

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

तदनन्तर राजपरिवारकी उन स्त्रियोंने परम सौभाग्यवती सीता, यशस्विनी ऊर्मिला तथा कुशध्वजकी दोनों कन्याओं—माण्डवी और श्रुतकीर्तिको सवारीसे उतारा और मंगल गीत गाती हुई सब वधुओंको घरमें ले गयीं। वे प्रवेशकालिक होमकर्मसे सुशोभित तथा रेशमी साडि़योंसे अलंकृत थीं॥ ११-१२॥