1-Balkand / Sarga 76
Shloka 18
Shloka
न चेयं मम काकुत्स्थ व्रीडा भवितुमर्हति।त्वया त्रैलोक्यनाथेन यदहं विमुखीकृतः ॥१९॥
Sarga 76 / Shloka 18 Balkand