1-Balkand / Sarga 75
Shloka 7
Shloka
स त्वं धर्मपरो भूत्वा कश्यपाय वसुंधराम्।दत्त्वा वनमुपागम्य महेन्द्रकृतकेतनः ॥८॥
Sarga 75 / Shloka 7 Balkand