1-Balkand / Sarga 75
Shloka 27
Shloka
योजयस्व धनुःश्रेष्ठे शरं परपुरंजयम्।यदि शक्तोऽसि काकुत्स्थ द्वन्द्वं दास्यामि ते ततः ॥२८॥
Sarga 75 / Shloka 27 Balkand