1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 75 / Shloka 27 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 75
Shloka 27

Balkand

77 Sarga
27 Shloka
1/75/27
1-Balkand / Sarga 75 Shloka 27
Shloka
योजयस्व धनुःश्रेष्ठे शरं परपुरंजयम्।
यदि शक्तोऽसि काकुत्स्थ द्वन्द्वं दास्यामि ते ततः ॥२८॥

Bhashya Content For This Shloka

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘श्रीराम! इस प्रकार यह महान् वैष्णवधनुष मेरे पिता-पितामहोंके अधिकारमें रहता चला आया है; अब तुम क्षत्रियधर्मको सामने रखकर यह उत्तम धनुष हाथमें लो और इस श्रेष्ठ धनुषपर एक ऐसा बाण चढ़ाओ, जो शत्रुनगरीपर विजय पानेमें समर्थ हो; यदि तुम ऐसा कर सके तो मैं तुम्हें द्वन्द्व-युद्धका अवसर दूँगा॥ २७-२८॥

Footnote

इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें