1-Balkand / Sarga 75
Shloka 24
Shloka
पृथिवीं चाखिलां प्राप्य कश्यपाय महात्मने।यज्ञस्यान्तेऽददं राम दक्षिणां पुण्यकर्मणे ॥२५॥
Sarga 75 / Shloka 24 Balkand