1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 74 / Shloka 6 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 74
Shloka 6

Balkand

77 Sarga
24 Shloka
1/74/6
1-Balkand / Sarga 74 Shloka 6
Shloka
ददौ राजा सुसंहृष्टः कन्याधनमनुत्तमम्।
दत्त्वा बहुविधं राजा समनुज्ञाप्य पार्थिवम् ॥६॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

इस प्रकार मिथिलापति राजा जनकने बड़े हर्षके साथ उत्तमोत्तम कन्याधन (दहेज) दिया। नाना प्रकारकी वस्तुएँ दहेजमें देकर महाराज दशरथकी आज्ञा ले वे पुन: मिथिलानगरके भीतर अपने महलमें लौट आये। उधर अयोध्यानरेश राजा दशरथ भी सम्पूर्ण महर्षियोंको आगे करके अपने महात्मा पुत्रों, सैनिकों तथा सेवकोंके साथ अपनी राजधानीकी ओर प्रस्थित हुए॥ ६-७