1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 74 / Shloka 4 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 74
Shloka 4

Balkand

77 Sarga
24 Shloka
1/74/4
1-Balkand / Sarga 74 Shloka 4
Shloka
कम्बलानां च मुख्यानां क्षौमान् कोट्यम्बराणि च।
हस्त्यश्वरथपादातं दिव्यरूपं स्वलंकृतम् ॥४॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

उस समय विदेहराज जनकने अपनी कन्याओंके निमित्त दहेजमें बहुत अधिक धन दिया। उन मिथिला-नरेशने कई लाख गौएँ, कितनी ही अच्छी-अच्छी कालीनें तथा करोड़ोंकी संख्यामें रेशमी और सूती वस्त्र दिये, भाँति-भाँतिके गहनोंसे सजे हुए बहुत-से दिव्य हाथी, घोड़े, रथ और पैदल सैनिक भेंट किये॥ ३-४॥