1-Balkand / Sarga 74
Shloka 24
Shloka
प्रतिगृह्य तु तां पूजामृषिदत्तां प्रतापवान्।रामं दाशरथिं रामो जामदग्न्योऽभ्यभाषत ॥२४॥
Sarga 74 / Shloka 24 Balkand