1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 74 / Shloka 22 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 74
Shloka 22

Balkand

77 Sarga
24 Shloka
1/74/22
1-Balkand / Sarga 74 Shloka 22
Shloka
पूर्वं क्षत्रवधं कृत्वा गतमन्युर्गतज्वरः।
क्षत्रस्योत्सादनं भूयो न खल्वस्य चिकीर्षितम् ॥२२॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘क्या अपने पिताके वधसे अमर्षके वशीभूत हो ये क्षत्रियोंका संहार नहीं कर डालेंगे? पूर्वकालमें क्षत्रियोंका वध करके इन्होंने अपना क्रोध उतार लिया है। अब इनकी बदला लेनेकी चिन्ता दूर हो चुकी है। अत: फिर क्षत्रियोंका संहार करना इनके लिये अभीष्ट नहीं है, यह निश्चयपूर्वक कहा जा सकता है’॥ २१-२२॥