1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 74 / Shloka 21 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 74
Shloka 21

Balkand

77 Sarga
24 Shloka
1/74/21
1-Balkand / Sarga 74 Shloka 21
Shloka
संगता मुनयः सर्वे संजजल्पुरथो मिथः।
कच्चित् पितृवधामर्षी क्षत्रं नोत्सादयिष्यति ॥२१॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘क्या अपने पिताके वधसे अमर्षके वशीभूत हो ये क्षत्रियोंका संहार नहीं कर डालेंगे? पूर्वकालमें क्षत्रियोंका वध करके इन्होंने अपना क्रोध उतार लिया है। अब इनकी बदला लेनेकी चिन्ता दूर हो चुकी है। अत: फिर क्षत्रियोंका संहार करना इनके लिये अभीष्ट नहीं है, यह निश्चयपूर्वक कहा जा सकता है’॥ २१-२२॥