1-Balkand / Sarga 74
Shloka 18
Shloka
कैलासमिव दुर्धर्षं कालाग्निमिव दुःसहम्।ज्वलन्तमिव तेजोभिर्दुर्निरीक्ष्यं पृथग्जनैः ॥१८॥
Sarga 74 / Shloka 18 Balkand