1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 74 / Shloka 17 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 74
Shloka 17

Balkand

77 Sarga
24 Shloka
1/74/17
1-Balkand / Sarga 74 Shloka 17
Shloka
ददर्श भीमसंकाशं जटामण्डलधारिणम्।
भार्गवं जामदग्न्येयं राजा राजविमर्दनम् ॥१७॥

Bhashya Content For This Shloka

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

उस समय राजा दशरथने देखा—क्षत्रिय राजाओंका मान-मर्दन करनेवाले भृगुकुलनन्दन जमदग्निकुमार परशुराम सामनेसे आ रहे हैं। वे बड़े भयानक-से दिखायी देते थे। उन्होंने मस्तकपर बड़ी-बड़ी जटाएँ धारण कर रखी थीं। वे कैलासके समान दुर्जय और कालाग्निके समान दु:सह प्रतीत होते थे। तेजोमण्डलद्वारा जाज्वल्यमान-से हो रहे थे। साधारण लोगोंके लिये उनकी ओर देखना भी कठिन था। वे कंधेपर फरसा रखे और हाथमें विद्युद्गणोंके समान दीप्तिमान् धनुष एवं भयंकर बाण लिये त्रिपुरविनाशक भगवान् शिवके समान जान पड़ते थे॥ १७—१९॥