1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 74 / Shloka 11 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 74
Shloka 11

Balkand

77 Sarga
24 Shloka
1/74/11
1-Balkand / Sarga 74 Shloka 11
Shloka
किमिदं हृदयोत्कम्पि मनो मम विषीदति।
राज्ञो दशरथस्यैतच्छ्रुत्वा वाक्यं महानृषिः ॥११॥

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

राजा दशरथका यह वचन सुनकर महर्षि वसिष्ठने मधुर वाणीमें कहा—‘राजन्! इस शकुनका जो फल है, उसे सुनिये—आकाशमें पक्षियोंके मुखसे जो बात निकल रही है, वह बताती है कि इस समय कोई घोर भय उपस्थित होनेवाला है, परंतु हमें दाहिने रखकर जानेवाले ये मृग उस भयके शान्त हो जानेकी सूचना दे रहे हैं; इसलिये आप यह चिन्ता छोडि़ये’॥ ११-१२