1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 74 / Shloka 10 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 74
Shloka 10

Balkand

77 Sarga
24 Shloka
1/74/10
1-Balkand / Sarga 74 Shloka 10
Shloka
तान् दृष्ट्वा राजशार्दूलो वसिष्ठं पर्यपृच्छत।
असौम्याः पक्षिणो घोरा मृगाश्चापि प्रदक्षिणाः ॥१०॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

उन सबको देखकर राजसिंह दशरथने वसिष्ठजीसे पूछा—‘मुनिवर! एक ओर तो ये भयंकर पक्षी घोर शब्द कर रहे हैं और दूसरी ओर ये मृग हमें दाहिनी ओर करके जा रहे हैं; यह अशुभ और शुभ दो प्रकारका शकुन कैसा? यह मेरे हृदयको कम्पित किये देता है। मेरा मन विषादमें डूबा जाता है’॥ १०