1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 73 / Shloka 4 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 73
Shloka 4

Balkand

77 Sarga
40 Shloka
1/73/4
1-Balkand / Sarga 73 Shloka 4
Shloka
स्वस्रीयं मम राजेन्द्र द्रष्टुकामो महीपतिः।
तदर्थमुपयातोऽहमयोध्यां रघुनन्दन ॥४॥

Bhashya Content For This Shloka

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘रघुनन्दन! केकयदेशके महाराजने बड़े स्नेहके साथ आपका कुशल-समाचार पूछा है और आप भी हमारे यहाँके जिन-जिन लोगोंकी कुशलवार्ता जानना चाहते होंगे, वे सब इस समय स्वस्थ और सानन्द हैं। राजेन्द्र! केकयनरेश मेरे भान्जे भरतको देखना चाहते हैं। अत: इन्हें लेनेके लिये ही मैं अयोध्या आया था॥