1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 73 / Shloka 37 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 73
Shloka 37

Balkand

77 Sarga
40 Shloka
1/73/37
1-Balkand / Sarga 73 Shloka 37
Shloka
पुष्पवृष्टिर्महत्यासीदन्तरिक्षात् सुभास्वरा।
दिव्यदुन्दुभिनिर्घोषैर्गीतवादित्रनिःस्वनैः ॥ ३७॥

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

उस समय आकाशसे फूलोंकी बड़ी भारी वर्षा हुई, जो सुहावनी लगती थी। दिव्य दुन्दुभियोंकी गम्भीर ध्वनि, दिव्य गीतोंके मनोहर शब्द और दिव्य वाद्योंके मधुर घोषके साथ झुंड-की-झुंड अप्सराएँ नृत्य करने लगीं और गन्धर्व मधुर गीत गाने लगे। उन रघुवंशशिरोमणि राजकुमारोंके विवाहमें वह अद्भुत दृश्य दिखायी दिया॥ ३७-३८॥