1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 73 / Shloka 35 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 73
Shloka 35

Balkand

77 Sarga
40 Shloka
1/73/35
1-Balkand / Sarga 73 Shloka 35
Shloka
चत्वारस्ते चतसॄणां वसिष्ठस्य मते स्थिताः।
अग्निं प्रदक्षिणं कृत्वा वेदिं राजानमेव च ॥३५॥

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

राजा जनकका यह वचन सुनकर उन चारों राजकुमारोंने चारों राजकुमारियोंके हाथ अपने हाथमें लिये। फिर वसिष्ठजीकी सम्मतिसे उन रघुकुलरत्न महामनस्वी राजकुमारोंने अपनी-अपनी पत्नीके साथ अग्नि, वेदी, राजा दशरथ तथा ऋषि-मुनियोंकी परिक्रमा की और वेदोक्त विधिके अनुसार वैवाहिक कार्य पूर्ण किया॥ ३४—३६॥