1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 73 / Shloka 34 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 73
Shloka 34

Balkand

77 Sarga
40 Shloka
1/73/34
1-Balkand / Sarga 73 Shloka 34
Shloka
पत्नीभिः सन्तु काकुत्स्था मा भूत् कालस्य पर्ययः।
जनकस्य वचः श्रुत्वा पाणीन् पाणिभिरस्पृशन् ॥३४॥

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

राजा जनकका यह वचन सुनकर उन चारों राजकुमारोंने चारों राजकुमारियोंके हाथ अपने हाथमें लिये। फिर वसिष्ठजीकी सम्मतिसे उन रघुकुलरत्न महामनस्वी राजकुमारोंने अपनी-अपनी पत्नीके साथ अग्नि, वेदी, राजा दशरथ तथा ऋषि-मुनियोंकी परिक्रमा की और वेदोक्त विधिके अनुसार वैवाहिक कार्य पूर्ण किया॥ ३४—३६॥