1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 73 / Shloka 33 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 73
Shloka 33

Balkand

77 Sarga
40 Shloka
1/73/33
1-Balkand / Sarga 73 Shloka 33
Shloka
श्रुतकीर्तेर्महाबाहो पाणिं गृह्णीष्व पाणिना।
सर्वे भवन्तः सौम्याश्च सर्वे सुचरितव्रताः ॥३३॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

फिर धर्मात्मा मिथिलेशने शत्रुघ्नको सम्बोधित करके कहा—‘महाबाहो! तुम अपने हाथसे श्रुतकीर्तिका पाणिग्रहण करो। तुम चारों भाई शान्तस्वभाव हो। तुम सबने उत्तम व्रतका भलीभाँति आचरण किया है। ककुत्स्थकुलके भूषणरूप तुम चारों भाई पत्नीसे संयुक्त हो जाओ। इस कार्यमें विलम्ब नहीं होना चाहिये’॥ ३२-३३