1-Balkand / Sarga 73
Shloka 32
Shloka
गृहाण पाणिं माण्डव्याः पाणिना रघुनन्दन।शत्रुघ्नं चापि धर्मात्मा अब्रवीन्मिथिलेश्वरः ॥३२॥
Sarga 73 / Shloka 32 Balkand