1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 73 / Shloka 30 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 73
Shloka 30

Balkand

77 Sarga
40 Shloka
1/73/30
1-Balkand / Sarga 73 Shloka 30
Shloka
अब्रवीज्जनको राजा हर्षेणाभिपरिप्लुतः।
लक्ष्मणागच्छ भद्रं ते ऊर्मिलामुद्यतां मया ॥३०॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

देवताओंके नगाड़े बजने लगे और आकाशसे फूलोंकी बड़ी भारी वर्षा हुई। इस प्रकार मन्त्र और संकल्पके जलके साथ अपनी पुत्री सीताका दान करके हर्षमग्न हुए राजा जनकने लक्ष्मणसे कहा—‘लक्ष्मण! तुम्हारा कल्याण हो। आओ, मैं ऊर्मिलाको तुम्हारी सेवामें दे रहा हूँ। इसे स्वीकार करो। इसका हाथ अपने हाथमें लो। इसमें विलम्ब नहीं होना चाहिये’॥ २९-३०