1-Balkand / Sarga 73
Shloka 12
Shloka
दातृप्रतिग्रहीतृभ्यां सर्वार्थाः सम्भवन्ति हि।स्वधर्मं प्रतिपद्यस्व कृत्वा वैवाह्यमुत्तमम् ॥१२॥
Sarga 73 / Shloka 12 Balkand