1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 73 / Shloka 10 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 73
Shloka 10

Balkand

77 Sarga
40 Shloka
1/73/10
1-Balkand / Sarga 73 Shloka 10
Shloka
वसिष्ठं पुरतः कृत्वा महर्षीनपरानपि।
वसिष्ठो भगवानेत्य वैदेहमिदमब्रवीत् ॥१०॥

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1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

तत्पश्चात् विवाहके योग्य विजय नामक मुहूर्त आनेपर दूल्हेके अनुरूप समस्त वेश-भूषासे अलंकृत हुए भाइयोंके साथ श्रीरामचन्द्रजी भी वहाँ आये। वे विवाहकालोचित मंगलाचार पूर्ण कर चुके थे तथा वसिष्ठ मुनि एवं अन्यान्य महर्षियोंको आगे करके उस मण्डपमें पधारे थे। उस समय भगवान् वसिष्ठने विदेहराज जनकके पास जाकर इस प्रकार कहा—॥ ९-१०॥