1-Balkand / Sarga 72
Shloka 5
Shloka
अस्य धर्मात्मनो राजन् रूपेणाप्रतिमं भुवि।सुताद्वयं नरश्रेष्ठ पत्न्यर्थं वरयामहे ॥५॥
Sarga 72 / Shloka 5 Balkand