1-Balkand / Sarga 72
Shloka 2
Shloka
अचिन्त्यान्यप्रमेयाणि कुलानि नरपुंगव।इक्ष्वाकूणां विदेहानां नैषां तुल्योऽस्ति कश्चन ॥२॥
Sarga 72 / Shloka 2 Balkand