1-Balkand / Sarga 71
Shloka 5
Shloka
उदावसोस्तु धर्मात्मा जातो वै नन्दिवर्धनः।नन्दिवर्धसुतः शूरः सुकेतुर्नाम नामतः ॥५॥
Sarga 71 / Shloka 5 Balkand