1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 71 / Shloka 2 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 71
Shloka 2

Balkand

77 Sarga
24 Shloka
1/71/2
1-Balkand / Sarga 71 Shloka 2
Shloka
प्रदाने हि मुनिश्रेष्ठ कुलं निरवशेषतः।
वक्तव्यं कुलजातेन तन्निबोध महामते ॥२॥

Bhashya Content For This Shloka

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

महर्षि वसिष्ठ जब इस प्रकार इक्ष्वाकुवंशका परिचय दे चुके, तब राजा जनकने हाथ जोड़कर उनसे कहा— ‘मुनिश्रेष्ठ! आपका भला हो। अब हम भी अपने कुलका परिचय दे रहे हैं, सुनिये। महामते! कुलीन पुरुषके लिये कन्यादानके समय अपने कुलका पूर्णरूपेण परिचय देना आवश्यक है; अत: आप सुननेकी कृपा करें॥ १-२॥