1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 70 / Shloka 34 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 70
Shloka 34

Balkand

77 Sarga
45 Shloka
1/70/34
1-Balkand / Sarga 70 Shloka 34
Shloka
स तामभ्यवदद् विप्रः पुत्रेप्सुं पुत्रजन्मनि।
तव कुक्षौ महाभागे सुपुत्रः सुमहाबलः ॥३४॥

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘उस समय ब्रह्मर्षि च्यवनने पुत्रकी अभिलाषा रखनेवाली कालिन्दीसे पुत्र-जन्मके विषयमें कहा— ‘महाभागे! तुम्हारे उदरमें एक महान् बलवान्, महातेजस्वी और महापराक्रमी उत्तम पुत्र है, वह कान्तिमान् बालक थोड़े ही दिनोंमें गर (जहर) के साथ उत्पन्न होगा। अत: कमललोचने! तुम पुत्रके लिये चिन्ता न करो’॥