1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 70 / Shloka 32 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 70
Shloka 32

Balkand

77 Sarga
45 Shloka
1/70/32
1-Balkand / Sarga 70 Shloka 32
Shloka
भार्गवश्च्यवनो नाम हिमवन्तमुपाश्रितः।
तत्र चैका महाभागा भार्गवं देववर्चसम् ॥३२॥

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘उस समय उस रमणीय एवं श्रेष्ठ पर्वतपर भृगुकुलमें उत्पन्न हुए महामुनि च्यवन तपस्यामें लगे हुए थे। हिमालयपर ही उनका आश्रम था। उन दोनों रानियोंमेंसे एक (जिसे जहर दिया गया था) कालिन्दीनामसे प्रसिद्ध थी। विकसित कमलदलके समान नेत्रोंवाली महाभागा कालिन्दी एक उत्तम पुत्र पानेकी इच्छा रखती थी। उसने देवतुल्य तेजस्वी भृगुनन्दन च्यवनके पास जाकर उन्हें प्रणाम किया॥ ३१—३३॥