1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 70 / Shloka 3 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 70
Shloka 3

Balkand

77 Sarga
45 Shloka
1/70/3
1-Balkand / Sarga 70 Shloka 3
Shloka
वार्याफलकपर्यन्तां पिबन्निक्षुमतीं नदीम्।
सांकाश्यां पुण्यसंकाशां विमानमिव पुष्पकम् ॥३॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘ब्रह्मन्! मेरे महातेजस्वी और पराक्रमी भाई कुशध्वज जो अत्यन्त धर्मात्मा हैं, इस समय इक्षुमती नदीका जल पीते हुए उसके किनारे बसी हुई कल्याणमयी सांकाश्या नगरीमें निवास करते हैं। उसके चारों ओरके परकोटोंकी रक्षाके लिये शत्रुओंके निवारणमें समर्थ बड़े-बड़े यन्त्र लगाये गये हैं। वह पुरी पुष्पकविमानके समान विस्तृत तथा पुण्यसे उपलब्ध होनेवाले स्वर्गलोकके सदृश सुन्दर है॥ २-३॥