1-Balkand / Sarga 70
Shloka 18
Shloka
एष वक्ष्यति धर्मात्मा वसिष्ठो मे यथाक्रमम्।तूष्णींभूते दशरथे वसिष्ठो भगवानृषिः ॥१८॥
Sarga 70 / Shloka 18 Balkand