1-Balkand / Sarga 70
Shloka 14
Shloka
स त्वां द्रष्टुं व्यवसितः सोपाध्यायपुरोहितम्।मन्त्रिश्रेष्ठवचः श्रुत्वा राजा सर्षिगणस्तथा ॥१४॥
Sarga 70 / Shloka 14 Balkand