1-Balkand / Sarga 7
Shloka 5
Shloka
सुयज्ञोऽप्यथ जाबालिः काश्यपोऽप्यथ गौतमः ।मार्कण्डेयस्तु दीर्घायुस्तथा कात्यायनो द्विजः ॥१-७-५॥
Sarga 7 / Shloka 5 Balkand