1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 7 / Shloka 17 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 7
Shloka 17

Balkand

77 Sarga
24 Shloka
1/7/17
1-Balkand / Sarga 7 Shloka 17
Shloka
गुरोर्गुणगृहीताश्च प्रख्याताश्च पराक्रमैः ।
विदेशेष्वपि विज्ञाताः सर्वतो बुद्धिनिश्चयाः ॥१-७-१७॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

अपने गुणोंके कारण वे सभी मन्त्री गुरुतुल्य समादरणीय राजाके अनुग्रहपात्र थे। अपने पराक्रमोंके कारण उनकी सर्वत्र ख्याति थी। विदेशोंमें भी सब लोग उन्हें जानते थे। वे सभी बातोंमें बुद्धिद्वारा भलीभाँति विचार करके किसी निश्चयपर पहुँचते थे॥ १७॥