1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 7 / Shloka 15 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 7
Shloka 15

Balkand

77 Sarga
24 Shloka
1/7/15
1-Balkand / Sarga 7 Shloka 15
Shloka
क्वचिन्न दुष्टस्तत्रासीत् परदाररतिर्नरः ।
प्रशान्तं सर्वमेवासीद् राष्ट्रं पुरवरं च तत् ॥१-७-१५॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

उन सबके भाव शुद्ध और विचार एक थे। उनकी जानकारीमें अयोध्यापुरी अथवा कोसलराज्यके भीतर कहीं एक भी मनुष्य ऐसा नहीं था, जो मिथ्यावादी, दुष्ट और परस्त्रीलम्पट हो। सम्पूर्ण राष्ट्र और नगरमें पूर्ण शान्ति छायी रहती थी॥ १४-१५॥