1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 7 / Shloka 14 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 7
Shloka 14

Balkand

77 Sarga
24 Shloka
1/7/14
1-Balkand / Sarga 7 Shloka 14
Shloka
शुचीनामेकबुद्धीनां सर्वेषां सम्प्रजानताम् ।
नासीत्पुरे वा राष्ट्रे वा मृषावादी नरः क्वचित् ॥१-७-१४॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

उन सबके भाव शुद्ध और विचार एक थे। उनकी जानकारीमें अयोध्यापुरी अथवा कोसलराज्यके भीतर कहीं एक भी मनुष्य ऐसा नहीं था, जो मिथ्यावादी, दुष्ट और परस्त्रीलम्पट हो। सम्पूर्ण राष्ट्र और नगरमें पूर्ण शान्ति छायी रहती थी॥ १४-१५॥