1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 68 / Shloka 3 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 68
Shloka 3

Balkand

77 Sarga
19 Shloka
1/68/3
1-Balkand / Sarga 68 Shloka 3
Shloka
बद्धाञ्जलिपुटाः सर्वे दूता विगतसाध्वसाः।
राजानं प्रश्रितं वाक्यमब्रुवन् मधुराक्षरम् ॥३॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

उन सभी दूतोंने दोनों हाथ जोड़ निर्भय हो राजासे मधुर वाणीमें यह विनययुक्त बात कही—‘महाराज! मिथिलापति राजा जनकने अग्निहोत्रकी अग्निको सामने रखकर स्नेहयुक्त मधुर वाणीमें सेवकोंसहित आपका तथा आपके उपाध्याय और पुरोहितोंका बारम्बार कुशल-मंगल पूछा है॥ ३—५॥