1-Balkand / Sarga 68
Shloka 16
Shloka
दृष्टवीर्यस्तु काकुत्स्थो जनकेन महात्मना।सम्प्रदानं सुतायास्तु राघवे कर्तुमिच्छति ॥१६॥
Sarga 68 / Shloka 16 Balkand