1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 67 / Shloka 25 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 67
Shloka 25

Balkand

77 Sarga
27 Shloka
1/67/25
1-Balkand / Sarga 67 Shloka 25
Shloka
राजानं प्रश्रितैर्वाक्यैरानयन्तु पुरं मम।
प्रदानं वीर्यशुल्कायाः कथयन्तु च सर्वशः ॥२५॥

Bhashya Content For This Shloka

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘ब्रह्मन्! कुशिकनन्दन! आपका कल्याण हो। यदि आपकी आज्ञा हो तो मेरे मन्त्री रथपर सवार होकर बड़ी उतावलीके साथ शीघ्र ही अयोध्याको जायँ और विनययुक्त वचनोंद्वारा महाराज दशरथको मेरे नगरमें लिवा लायें। साथ ही यहाँका सब समाचार बताकर यह निवेदन करें कि जिसके लिये पराक्रमका ही शुल्क नियत किया गया था, उस जनककुमारी सीताका विवाह श्रीरामचन्द्रजीके साथ होने जा रहा है॥ २४-२५॥