1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 67 / Shloka 24 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 67
Shloka 24

Balkand

77 Sarga
27 Shloka
1/67/24
1-Balkand / Sarga 67 Shloka 24
Shloka
भवतोऽनुमते ब्रह्मन् शीघ्रं गच्छन्तु मन्त्रिणः।
मम कौशिक भद्रं ते अयोध्यां त्वरिता रथैः ॥२४॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘ब्रह्मन्! कुशिकनन्दन! आपका कल्याण हो। यदि आपकी आज्ञा हो तो मेरे मन्त्री रथपर सवार होकर बड़ी उतावलीके साथ शीघ्र ही अयोध्याको जायँ और विनययुक्त वचनोंद्वारा महाराज दशरथको मेरे नगरमें लिवा लायें। साथ ही यहाँका सब समाचार बताकर यह निवेदन करें कि जिसके लिये पराक्रमका ही शुल्क नियत किया गया था, उस जनककुमारी सीताका विवाह श्रीरामचन्द्रजीके साथ होने जा रहा है॥ २४-२५॥