1-Balkand / Sarga 67
Shloka 12
Shloka
विश्वामित्रः सरामस्तु श्रुत्वा जनकभाषितम्।वत्स राम धनुः पश्य इति राघवमब्रवीत् ॥१२॥
Sarga 67 / Shloka 12 Balkand