1-Balkand / Sarga 66
Shloka 22
Shloka
रोषेण महताविष्टाः पीडयन् मिथिलां पुरीम्।ततः संवत्सरे पूर्णे क्षयं यातानि सर्वशः ॥२२॥
Sarga 66 / Shloka 22 Balkand