1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 66 / Shloka 16 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 66
Shloka 16

Balkand

77 Sarga
26 Shloka
1/66/16
1-Balkand / Sarga 66 Shloka 16
Shloka
वरयामासुरागत्य राजानो मुनिपुंगव।
तेषां वरयतां कन्यां सर्वेषां पृथिवीक्षिताम् ॥१६॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘परंतु भगवन्! कन्याका वरण करनेवाले उन सभी राजाओंको मैंने यह बता दिया कि मेरी कन्या वीर्यशुल्का है। (उचित पराक्रम प्रकट करनेपर ही कोई पुरुष उसके साथ विवाह करनेका अधिकारी हो सकता है।) यही कारण है कि मैंने आजतक किसीको अपनी कन्या नहीं दी॥ १६॥