1-Balkand / Sarga 66
Shloka 15
Shloka
वीर्यशुल्केति मे कन्या स्थापितेयमयोनिजा।भूतलादुत्थितां तां तु वर्धमानां ममात्मजाम् ॥१५॥
Sarga 66 / Shloka 15 Balkand