1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 66 / Shloka 14 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 66
Shloka 14

Balkand

77 Sarga
26 Shloka
1/66/14
1-Balkand / Sarga 66 Shloka 14
Shloka
क्षेत्रं शोधयता लब्धा नाम्ना सीतेति विश्रुता।
भूतलादुत्थिता सा तु व्यवर्धत ममात्मजा ॥१४॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘एक दिन मैं यज्ञके लिये भूमिशोधन करते समय खेतमें हल चला रहा था। उसी समय हलके अग्रभागसे जोती गयी भूमि (हराई या सीता) से एक कन्या प्रकट हुई। सीता (हलद्वारा खींची गयी रेखा) से उत्पन्न होनेके कारण उसका नाम सीता रखा गया। पृथ्वीसे प्रकट हुई वह मेरी कन्या क्रमश: बढ़कर सयानी हुई॥ १३-१४॥