1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 66 / Shloka 13 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 66
Shloka 13

Balkand

77 Sarga
26 Shloka
1/66/13
1-Balkand / Sarga 66 Shloka 13
Shloka
न्यासभूतं तदा न्यस्तमस्माकं पूर्वजे विभौ।
अथ मे कृषतः क्षेत्रं लांगलादुत्थिता ततः ॥१३॥

Bhashya Content For This Shloka

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘एक दिन मैं यज्ञके लिये भूमिशोधन करते समय खेतमें हल चला रहा था। उसी समय हलके अग्रभागसे जोती गयी भूमि (हराई या सीता) से एक कन्या प्रकट हुई। सीता (हलद्वारा खींची गयी रेखा) से उत्पन्न होनेके कारण उसका नाम सीता रखा गया। पृथ्वीसे प्रकट हुई वह मेरी कन्या क्रमश: बढ़कर सयानी हुई॥ १३-१४॥