1-Balkand / Sarga 66
Shloka 13
Shloka
न्यासभूतं तदा न्यस्तमस्माकं पूर्वजे विभौ।अथ मे कृषतः क्षेत्रं लांगलादुत्थिता ततः ॥१३॥
Sarga 66 / Shloka 13 Balkand