1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 66 / Shloka 10 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 66
Shloka 10

Balkand

77 Sarga
26 Shloka
1/66/10
1-Balkand / Sarga 66 Shloka 10
Shloka
यस्माद् भागार्थिनो भागं नाकल्पयत मे सुराः।
वरांगानि महार्हाणि धनुषा शातयामि वः ॥१०॥

Bhashya Content For This Shloka

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘कहते हैं, पूर्वकालमें दक्षयज्ञ-विध्वंसके समय परम पराक्रमी भगवान् शङ्करने खेल-खेलमें ही रोषपूर्वक इस धनुषको उठाकर यज्ञ-विध्वंसके पश्चात् देवताओंसे कहा—‘देवगण! मैं यज्ञमें भाग प्राप्त करना चाहता था, किंतु तुमलोगोंने नहीं दिया। इसलिये इस धनुषसे मैं तुम सब लोगोंके परम पूजनीय श्रेष्ठ अंग—मस्तक काट डालूँगा’॥ ९-१०॥