1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 65 / Shloka 9 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 65
Shloka 9

Balkand

77 Sarga
40 Shloka
1/65/9
1-Balkand / Sarga 65 Shloka 9
Shloka
त्रैलोक्यं येन सम्भ्रान्तमातापितमिवाभवत्।
ततो देवर्षिगन्धर्वाः पन्नगोरगराक्षसाः ॥९॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

उससे तीनों लोकोंके प्राणी घबरा उठे, सभी संतप्त-से होने लगे। उस समय देवता, ऋषि, गन्धर्व, नाग, सर्प और राक्षस सब मुनिकी तपस्यासे मोहित हो गये। उनके तेजसे सबकी कान्ति फीकी पड़ गयी। वे सब-के-सब दु:खसे व्याकुल हो पितामह ब्रह्माजीसे बोले—॥ ९-१०॥